ऊबन-दूबन

Icarus Drowning

आसमां बेहता है बादलों को बाहों में लेके, मैं बेहता हूं जब तुम बाहों में होती हो। बाहों में होती भी हो क्या? आज रात बाहें हमारी खाली है, कल रात भी खाली थी, कल भी शायद खाली होंगी। खालीपन है भरा पड़ा, भरा भी तो है ये दिल तो तुम्हारे प्यार से। सांस लूं… Continue reading ऊबन-दूबन

बिना पेंदे के प्याले

Art by Andrea Meyer

जान जाती है जब आप उठ कर जाते हो, या फिर बस ऐसा लगता है हमें। ये जो जान है वो सिमट कर रह जाती है हमारी मुट्ठी में। इन एहसासों को भर देता एक कटोरे में, और घोल के पी जाता एक प्याले में जिस पर लिखा था आपका नाम कभी। जब आपके रस्ते… Continue reading बिना पेंदे के प्याले

पूष की पंखुरियाँ

इक बार जो मैंने तुम्हें निहारा तो जी किया की तुम्हारे घुंघरेले बाल जो इस पूष की हवा में अक्सर बिखर जाते हैं, उन्हें सवार डालूं। सवारने का काम तो हमें अच्छी तरह से आता है - किसी ने सिखाया नहीं, पर फिर ये खोपड़ी में भरा दिमाग कह जाता है कि तुम्हें तो अपने… Continue reading पूष की पंखुरियाँ

कलियाँ बने पुष्प, पर तुम ना आई

२ दिन बदले २ साल में, और तुम्हारे हाथों से लगाए फूल अब तक मुरझाए नहीं| अब जब तुम हो नहीं तो तुम्हारे संग बिताये लम्हों की याद में हम उन्ही फूलों से मालें गूथते हैं - ना जाने कब तुम्हारे आने की खबर आ जाए और हम आस्तिक बनकर पत्थर की मूर्तियों पर माले… Continue reading कलियाँ बने पुष्प, पर तुम ना आई

तुम्हारी नज़रें मुझ पर पहरा डालतीं हैं

Art by Frank Frazetta

दुनिया से मैंने अपनी नज़रें चुराई तो वो तुम पर आ पड़ीं। और तुम इठलाते हुए, बलखाते हुए, इतराते हुए, अपनी ज़ुल्फ़ों को लहराते हुए वहां पर आई, और मुझे ऐसा लगा कि किसीने छेनी और हथौड़े से मेरे दिल में तुम्हारा चेहरा तराश दिया हो। अब तो बस ये मेरा दिल है जो तुम्हारा… Continue reading तुम्हारी नज़रें मुझ पर पहरा डालतीं हैं