कलियाँ बने पुष्प, पर तुम ना आई

२ दिन बदले २ साल में,
और तुम्हारे हाथों से लगाए फूल
अब तक मुरझाए नहीं|

अब जब तुम हो नहीं
तो तुम्हारे संग बिताये लम्हों की याद में
हम उन्ही फूलों से मालें गूथते हैं –

ना जाने कब तुम्हारे आने की खबर आ जाए
और हम आस्तिक बनकर पत्थर की मूर्तियों
पर माले चढाने लगें|

***

via The Postman’s Knock

 

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